गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, महराजगंज और देवरिया जिलों में सुगंधित काला नमक चावल और बागवानी फसलों (ड्रैगन फ्रूट, स्ट्रॉबेरी व शिमला मिर्च) की पैदावार बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश कृषि व उद्यान विभाग ने विशेष प्रोत्साहन योजना शुरू की है। योजना के तहत पंजीकृत 2,400 प्रगतिशील किसानों को सोलर ड्रिप इरिगेशन सिस्टम और प्रमाणित जैविक खाद पर 50 प्रतिशत की प्रत्यक्ष सब्सिडी (डीबीटी) जारी की गई है। सिद्धार्थनगर व गोरखपुर के कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) द्वारा विकसित नई बौनी किस्म 'काला नमक-102' से उत्पादन में 40% तक की वृद्धि दर्ज की जा रही है, जिससे पूर्वांचल के किसानों की प्रति एकड़ शुद्ध आय दोगुनी से अधिक होने का अनुमान है।
पूर्वांचल में काला नमक चावल और ड्रैगन फ्रूट की खेती में नई क्रांति
दैनिक गोरखपुर डिजिटल डेस्क, गोरखपुर/सिद्धार्थनगर:
पूर्वांचल की पारंपरिक धरोहर और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'बुद्ध के महाप्रसाद' के रूप में विख्यात सुगंधित काला नमक चावल के साथ-साथ अब विदेशी फल ड्रैगन फ्रूट और जैविक स्ट्रॉबेरी की खेती पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए समृद्धि का नया द्वार खोल रही है। कृषि एवं उद्यान विभाग ने गोरखपुर मंडल के 2,400 प्रगतिशील किसानों के खातों में सब्सिडी की पहली किस्त ट्रांसफर कर दी है।
नई किस्म 'काला नमक-102' से बंपर पैदावार:
पहले काला नमक धान का पौधा अधिक लंबा होने के कारण बारिश और आंधी में गिर जाता था, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित बौनी किस्म 'काला नमक-102' और 'केएन-3' मजबूत तने वाली हैं। यह मात्र 120 दिनों में पककर तैयार होती हैं और प्रति हेक्टेयर 35 से 40 क्विंटल तक उत्पादन देती हैं।
ड्रैगन फ्रूट और सोलर ड्रिप पर बंपर अनुदान:
- सोलर ड्रिप इरिगेशन (सूक्ष्म सिंचाई):
कम पानी में अधिक पैदावार के लिए ड्रिप सिंचाई पाइपलाइन और सोलर पंपिंग सेट पर किसानों को 50 से 70 प्रतिशत तक सरकारी अनुदान मिल रहा है।
- ड्रैगन फ्रूट के खंभे और पौधे:
गोरखपुर के चरगांवा, खोराबार और भटहट ब्लॉक के 140 से अधिक किसानों ने ड्रैगन फ्रूट की व्यावसायिक खेती शुरू की है। प्रति एकड़ ₹3.5 लाख तक के शुद्ध मुनाफे से युवाओं का रुझान बागवानी की ओर तेजी से बढ़ा है।
- ग्लोबल एक्सपोर्ट की तैयारी:
एपीडा (APEDA) के सहयोग से पूर्वांचल के काला नमक चावल और जैविक सब्जियों का सीधा निर्यात खाड़ी देशों (दुबई, शारजाह) और यूरोपीय मंडियों में करने के लिए वाराणसी के पेरिशेबल कार्गो सेंटर से विशेष अनुबंध किया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- लाभान्वित किसान: गोरखपुर, देवरिया, सिद्धार्थनगर व महराजगंज के 2,400 किसान
- अनुदान दर: सोलर ड्रिप व जैविक खाद पर 50% से 70% सब्सिडी (DBT द्वारा सीधे खाते में)
- नई किस्म: काला नमक-102 (कम ऊंचाई, तेज सुगंध, 40 क्विंटल/हेक्टेयर उत्पादन क्षमता)
- निर्यात संभावना: एपीडा के माध्यम से गल्फ और यूरोप को सीधा निर्यात
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