अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर में रविवार शाम अत्याधुनिक 3D रोबोटिक ऑर्थोपेडिक और स्पाइनल न्यूरो सर्जरी विंग का औपचारिक उद्घाटन किया गया। ₹28 करोड़ की लागत से स्थापित यह रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम न्यूनतम चीरे (Minimally Invasive) के साथ सब-मिलीमीटर सटीकता से घुटने व कूल्हे का टोटल जॉइंट रिप्लेसमेंट करता है। इससे ऑपरेशन के 24 घंटे के भीतर मरीज चलने में सक्षम हो रहे हैं। एम्स प्रशासन ने बताया कि इस अत्याधुनिक सुविधा के शुरू होने से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और नेपाल के मरीजों को अब दिल्ली या पीजीआई लखनऊ जाने की मजबूरी नहीं रहेगी और सरकारी दरों पर विश्वस्तरीय रोबोटिक सर्जरी की सुविधा मिलेगी।
एम्स गोरखपुर में पहली बार 3D रोबोटिक ऑर्थोपेडिक व न्यूरो सर्जरी यूनिट शुरू
दैनिक गोरखपुर डिजिटल डेस्क, एम्स गोरखपुर:
पूर्वी उत्तर प्रदेश में चिकित्सा एवं सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं के इतिहास में आज एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) गोरखपुर के ऑर्थोपेडिक्स एवं न्यूरोसर्जरी विभाग में अत्याधुनिक 3D रोबोटिक सर्जिकल सिस्टम का लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही एम्स गोरखपुर पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा राष्ट्रीय चिकित्सा संस्थान बन गया है जहां घुटने, कूल्हे और जटिल रीढ़ (स्पाइनल) की सर्जरी पूर्णतः कंप्यूटर गाइडेड रोबोटिक आर्म द्वारा की जाएगी।
3D रोबोटिक सर्जरी की मुख्य विशेषताएं:
- सब-मिलीमीटर शुद्धता (Sub-millimeter Precision):
यह 3D रोबोटिक सिस्टम मरीज के जोड़ का रियल-टाइम सीटी आधारित 3D मॉडल तैयार करता है। इसके जरिए इम्प्लांट का प्लेसमेंट 0.5 मिलीमीटर तक की सटीकता से होता है, जिससे इम्प्लांट 25 से 30 वर्षों तक बिना किसी परेशानी के कार्य करता है।
- न्यूनतम रक्तस्राव एवं दर्द रहित रिकवरी:
पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इसमें बहुत छोटा चीरा लगता है, जिससे मांसपेशियों और लिगामेंट्स को न्यूनतम नुकसान होता है। सर्जरी के 24 से 36 घंटे बाद ही मरीज सहारे के साथ चलने-फिरने लगता है।
- पूर्वी यूपी, बिहार और नेपाल को सीधा लाभ:
एम्स गोरखपुर की ओपीडी में प्रतिदिन 4,000 से अधिक मरीज पहुंचते हैं। रोबोटिक विंग शुरू होने से गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर के अलावा पश्चिमी बिहार और तराई नेपाल के मरीजों को अब लखनऊ या दिल्ली के निजी अस्पतालों में लाखों रुपये खर्च नहीं करने पड़ेंगे।
आयुष्मान कार्डधारकों को भी मिलेगी सुविधा:
एम्स के कार्यकारी निदेशक ने बताया कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के पात्र लाभार्थियों को नियमानुसार पैकेज के तहत यह आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। शुरुआती चरण में प्रति सप्ताह 15 से 20 रोबोटिक सर्जरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मुख्य बिंदु (Key Highlights):
- कुल परियोजना लागत: ₹28 करोड़ की अत्याधुनिक रोबोटिक ऑर्थोपेडिक व स्पाइन सूट
- सटीकता: सब-मिलीमीटर नेविगेशन से घुटने और कूल्हे का टोटल रिप्लेसमेंट
- अस्पताल में ठहराव: पारंपरिक 7 दिनों के स्थान पर मात्र 48 घंटे में डिस्चार्ज
- लाभार्थी क्षेत्र: गोरखपुर मंडल, देवीपाटन, चंपारण (बिहार) व नेपाल सीमावर्ती क्षेत्र
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